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Tuesday, 23 July 2019

ओ टी पी फ्राड का एक विचित्र मामला

ओ टी पी फ्राड का एक विचित्र मामला

*कल शाम को एक काल (call) आई, कोई लड़की थी*,

*बोली," सर, मैं जॉब के लिए रजिस्ट्रेशन कर रही थी । गलती से आपका नम्बर डाल दिया है, क्योकि मेरे और आपके मोबाइल नंबर में काफी समानता है । आपके पास थोड़ी देर में एक ओटीपी (OTP) आएगी, प्लीज बता दो सर, मेरी ज़िन्दगी का सवाल है।"*

*चूँकि बात बिल्कुल सही लग रही थी, मैनें मोबाइल इनबॉक्स (inbox) चेक किया, दो मैसेज (message) आए हुए थे। एक पर ओटीपी था, दूसरा एक मोबाइल से आया मैसेज। लिखा था;  "dear सर, आपके पास जो ओटीपी आयी है, प्लीज इस नंबर पर भेज दीजिये...Thanks in advance."*

*मैं मैसेज देख ही रहा था कि फोन दोबारा आया...मैनें ओके क्लिक किया। वही सुमधुर आवाज। बस नंबर दूसरा था। "सर, आपने देखा होगा अब तक ओटीपी आ गयी होगी । या तो बता दो या फारवर्ड कर दो उस नंबर पर...प्लीज..."*

*"मैं बोला, "बता दूंगा, पर आप पहले एक काम करो.."*

*"हाँ सर...बोलिए.."*

*"जो नंबर आपने रजिस्ट्रेशन में डाला है, वो मेरा नम्बर है और उसी से मिलता-जुलता नम्बर आपके पास भी है, तभी आपसे ये गलती हुई, है न?"*

*"हाँ सर.."*

*"ओके, उसी नम्बर से मुझे आप कॉल करो, ताकि मैं वेरीफाई (verify) कर सकूँ कि आप सही हो.."*

*"वो क्या है सर, उस नम्बर में बैलेंस नही है। सर...एक लड़की की बात पर आपको भरोसा नही...?"*

*"बात लड़की, लड़के और भरोसे की नही है। मैं आपको नही जानता, तो फिर बिना जांचे-परखे कैसे भरोसा कर लूँ..."*

*"तो  फिर रहने दीजिए...आप जैसे दुष्ट लोगों की वजह से ही आज मानवता से लोगों का भरोसा उठ गया है ।"*

*एक-दो गालियों के साथ उस सुमधुर कर्कशा ने फोन काट दिया।*

*...*

*मन भारी हो गया था। यह सोचने लगा कि शायद मैं ज्यादा अविश्वासी, अमानवीय और टेक्निकल होता जा रहा हूँ । दोबारा से उस नम्बर को डायल करके ओटीपी बताने के लिए फ़ोन उठाया । तभी मेरे बैंक का ईमेल का नोटिफिकेशन स्क्रीन पर फ़्लैश हुआ । बैंक का नोटिफिकेशन था, देखना जरूरी था। लिखा था;*

*Dear Sir/Madam,*

*You are trying to change your internet banking password, click the link below...*

*मैं सन्न रह गया... मानवता के नाम पर भी इतनी ठगबाज़ी... धोखेबाज़ी...*

*मन गुस्से से भर उठा, रीडायल किया, लड़ाई के मूड में...*

*उधर से जवाब आ रहा था;*

*The  customer, you are trying to reach is not available...*

*ख़ुद सावधान रहें-औरों को सचेत करें*

एक सरल चित्र है, लेकिन बहुत ही गहरे अर्थ के साथ।

ये एक सरल चित्र है, लेकिन बहुत ही गहरे अर्थ के साथ।

आदमी को पता नहीं है कि नीचे सांप है और महिला को नहीं पता है कि आदमी भी किसी पत्थर से दबा हुआ है।

महिला सोचती है: - मैं गिरने वाली हूं और मैं नहीं चढ़ सकती क्योंकि साँप मुझे काट रहा है।
आदमी अधिक ताक़त का उपयोग करके मुझे ऊपर क्यों नहीं खींचता!

आदमी सोचता है:- मैं बहुत दर्द में हूं फिर भी मैं आपको उतना ही खींच रहा हूँ जितना मैं कर सकता हूँ!
आप खुद कोशिश क्यों नहीं करती और कठिन चढ़ाई को पार कर लेती ।
आदमी को ये नहीं पता है कि औरत को सांप काट रहा है !

#नैतिकताः- आप उस दबाव को देख नहीं सकते जो सामने वाला झेल रहा है, और ठीक उसी तरह सामने वाला भी उस दर्द को नहीं देख सकता जिसमें आप हैं।

यह जीवन है, भले ही यह काम, परिवार, भावनाओं, दोस्तों, के साथ हो, आपको एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए, अलग अलग सोचना, एक-दूसरे के बारे में सोचना और बेहतर तालमेल बिठाना चाहिए।

हर कोई अपने जीवन में अपनी लड़ाई लड़ रहा है और सबके अपने अपने दुख हैं। इसीलिए कम से कम जब हम अपनों से मिलते हैं तब एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने के बजाय एक दूसरे को प्यार, स्नेह और साथ रहने की खुशी का एहसास दें, जीवन की इस यात्रा को लड़ने की बजाय प्यार और भरोसे पर आसानी से पार किया जा सकता है।

Coverage by editor of Print media

 Thanks to Editor of Print And Electronic Media for always support us with your wonderful coverage. #CMYogi #BJP4UP #PMModiji #BJP4IND #PMNa...